क्यों यारा कुछ बातें तुम्हें बैठकर बतानी थी , एक cup coffee तेरेसंग बाँटनी थी | पूँछना था तुझे , क्या याद भी हूँ मैं ? अरे वही तो हूँ ,जो तुझे देखके पगलोंकीतरह मुस्क़ुराती थीं , बस बेवज़ह हँसके निकल जाती थीं | हाँ , मुझे तो तुम पूरे के पूरे याद हो , वही लम्बी उँगलियाँ , वही अदाएं , तूम्हारे घुँगराले बाल , वही लेबाज़ वही ग़ुरूर , वही चाल , जैसे नई बोतल पुरानी शराब शराब से याद आया ज़नाब , हमपे आपका नशा सा था ! हिम्मत तो हममें तबभी थी , पर वक़्त थोड़ा ख़राब सा था वैसे महोब्बत तो की आपने भी थी , शायद बोलने में कच्चे थे | पता हैं मुझे , table पर पड़े ठन्डे चाय के मेरे c...