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Showing posts from June, 2020
                                                                        क्यों  यारा कुछ बातें तुम्हें बैठकर बतानी थी , एक cup coffee तेरेसंग बाँटनी थी |  पूँछना था तुझे , क्या याद भी हूँ मैं ? अरे वही तो हूँ ,जो तुझे देखके पगलोंकीतरह मुस्क़ुराती थीं ,                         बस  बेवज़ह हँसके निकल जाती थीं |  हाँ , मुझे तो तुम पूरे के  पूरे याद हो , वही लम्बी उँगलियाँ , वही अदाएं , तूम्हारे घुँगराले  बाल , वही  लेबाज़  वही ग़ुरूर , वही चाल , जैसे नई बोतल पुरानी शराब  शराब से याद आया ज़नाब , हमपे आपका नशा सा था ! हिम्मत तो हममें तबभी थी , पर वक़्त थोड़ा ख़राब सा था  वैसे महोब्बत तो की आपने भी थी , शायद बोलने में कच्चे थे |  पता हैं मुझे , table पर पड़े ठन्डे चाय के मेरे c...